श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 2: दिव्यता तथा दिव्य सेवा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.2.12 
तच्छ्रद्दधाना मुनयो ज्ञानवैराग्ययुक्तया ।
पश्यन्त्यात्मनि चात्मानं भक्त्या श्रुतगृहीतया ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
पूर्णतया जिज्ञासु विद्यार्थी या संत, जो ज्ञान और वैराग्य से सुसज्जित है, वह वेदांत-श्रुति से सुनी हुई भक्ति द्वारा परम सत्य का अनुभव करता है।
 
पूर्णतया जिज्ञासु विद्यार्थी या संत, जो ज्ञान और वैराग्य से सुसज्जित है, वह वेदांत-श्रुति से सुनी हुई भक्ति द्वारा परम सत्य का अनुभव करता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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