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bhagavat 1.19.22: ऋषियों ने जो कुछ बताया, सार्थकता और सच्चाई से परिपूर्ण था, जिसके परिणामस्वरूप वे सुनने में अत्यधिक मधुर और पूर्णसत्य प्रतीत हुए। इसलिए उन महान ऋषियों के कथन को सुनने के पश्चात महाराज परीक्षित ने भगवान श्री कृष्ण के कार्यों के बारे में पूछने के लिए ऋषियों की प्रशंसा की।   |   bhagavat अध्याय 1.19: शुकदेव गोस्वामी का प्रकट होना   ।   bhagavat स्कन्ध 1: सृष्टि   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 19: शुकदेव गोस्वामी का प्रकट होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.19.22 
आश्रुत्य तद‍ृषिगणवच: परीक्षित्
समं मधुच्युद् गुरु चाव्यलीकम् ।
आभाषतैनानभिनन्द्य युक्तान्
शुश्रूषमाणश्चरितानि विष्णो: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने जो कुछ बताया, सार्थकता और सच्चाई से परिपूर्ण था, जिसके परिणामस्वरूप वे सुनने में अत्यधिक मधुर और पूर्णसत्य प्रतीत हुए। इसलिए उन महान ऋषियों के कथन को सुनने के पश्चात महाराज परीक्षित ने भगवान श्री कृष्ण के कार्यों के बारे में पूछने के लिए ऋषियों की प्रशंसा की।
 
Whatever the great sages said was very sweet to hear, meaningful and the complete truth presented in a realistic manner. Therefore, after listening to them, Maharaja Pariksit greeted the great sages with a desire to hear about the activities of Lord Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)