एवं च तस्मिन्नरदेवदेवे
प्रायोपविष्टे दिवि देवसङ्घा: ।
प्रशस्य भूमौ व्यकिरन् प्रसूनै-
र्मुदा मुहुर्दुन्दुभयश्च नेदु: ॥ १८ ॥
अनुवाद
तब राजा महाराज परीक्षित प्राण त्यागने तक उपवास करने के लिए बैठ गए। स्वर्गलोक के सभी देवताओं ने राजा के इस कार्य की प्रशंसा की और खुशी के मारे पृथ्वी पर लगातार फूलों की वर्षा की और दैवीय नगाड़े बजाए।
Thus Maharaja Parikshit sat down to fast unto death. All the gods of heaven started praising the king for his act and being overjoyed, they started showering flowers on the earth and playing divine drums.
तात्पर्य
महाराज परीक्षित के समय तक भी अंतरग्रहीय संचार होता था, और महाराज परीक्षित के मोक्ष प्राप्ति के लिए प्राण त्यागने के समाचार आकाश के ऊँचे ग्रहों तक पहुँचते थे जहाँ बुद्धिमान देवता रहते हैं। देवता मनुष्यों से अधिक विलासी होते हैं, परन्तु वे सभी परमेश्वर के आज्ञाकारी होते हैं। दिव्य ग्रहों में ऐसा कोई भी नहीं है जो नास्तिक या अविश्वासी हो। इस प्रकार पृथ्वी के सतह पर भगवान का कोई भी भक्त उनकी हमेशा प्रशंसा करता है, और महाराज परीक्षित के मामले में वे बहुत प्रसन्न थे और इसलिए उन्होंने पृथ्वी पर पुष्प बरसाकर और दिव्य ढोल बजाकर सम्मान के प्रतीक दिए। कोई देवता किसी को ईश्वर के पास वापस जाते हुए देखकर आनंदित होता है। वह भगवान के भक्त से हमेशा प्रसन्न रहता है, इतना अधिक कि अपनी आध्यात्मिक शक्तियों से वह सभी मामलों में भक्तों की मदद कर सकता है। और अपने कार्यों द्वारा, प्रभु उनसे प्रसन्न होते हैं। पृथ्वी पर भगवान, देवता और भक्त के बीच पूर्ण सहयोग की एक अदृश्य श्रृंखला है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥