हे बालक, राजशाही शासन प्रणाली के माध्यम से रथ का चक्र धारण करने वाले भगवान का प्रतिनिधित्व किया जाता है और जब यह शासन प्रणाली खत्म हो जाती है, तो पूरी दुनिया चोरों से भर जाती है, जो तुरंत अरक्षित प्रजा को तितर-बितर किए गए मेमनों की तरह परास्त कर देते हैं।
O child, the Lord holding the chariot-wheel is represented by sole monarchy, and when that monarchy itself is destroyed, the entire world becomes filled with thieves, who instantly overpower the unprotected subjects like scattered lambs.
तात्पर्य
श्रीमद्-भागवतम् के अनुसार राजत्व शासन सर्वोच्च प्रभु भगवान, ईश्वर के व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करता है। कहा जाता है कि राजा भगवान के परम व्यक्तित्व के प्रतिनिधि हैं क्योंकि उन्हें जीवों की रक्षा के लिए ईश्वर के गुणों को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। कुरूक्षेत्र का युद्ध प्रभु के वास्तविक प्रतिनिधि, महाराज युधिष्ठिर को स्थापित करने के लिए प्रभु द्वारा नियोजित किया गया था। संस्कृति और भक्ति सेवा के द्वारा भली प्रकार से प्रशिक्षित एक आदर्श राजा मार्शल भावना के साथ एक उत्तम राजा बनता है। ऐसा व्यक्तिगत राजतंत्र तथाकथित निर्वाचित और गैर-जिम्मेदार लोकतंत्र से कहीं बेहतर है। आधुनिक लोकतंत्र के चोर और बदमाश मतों के गलत प्रतिनिधित्व के द्वारा चुनाव जीतते हैं, और सफल बदमाश और चोर जनसंख्या को नष्ट कर देते हैं। एक प्रशिक्षित सम्राट सैकड़ों बेकार मंत्री बदमाशों से कहीं बेहतर है, और यहाँ यह संकेत दिया गया है कि महाराज परीक्षित जैसी राजशाही व्यवस्था के उन्मूलन से लोगों की भीड़ कलियुग के कई हमलों के सामने खुल जाती है। वे कभी भी लोकतंत्र के अत्यधिक विज्ञापित रूप में खुश नहीं होते हैं। ऐसे राजरहित प्रशासन का परिणाम निम्नलिखित छंदों में वर्णित किया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥