चूँकि शमीक ऋषि एक अनुभवी, अच्छे ब्राह्मण थे, इसलिए वह अपने दोषी पुत्र के कार्यों को स्वीकार नहीं करते थे। वह अपने बेटे द्वारा किए गए सभी कार्यों के लिए विलाप करने लगे। राजा एक सामान्य नियम के रूप में श्रापों के क्षेत्राधिकार से परे था, और महाराजा परीक्षित जैसे एक अच्छे राजा की बात क्या है। राजा का अपराध सबसे तुच्छ था, और उसे मौत की सज़ा दी जाना निश्चित रूप से शृंगी के लिए एक बहुत बड़ा पाप था। इसलिए ऋषि शमीक को पूरी घटना पर पछतावा हुआ।
