विसृज्य तं च पप्रच्छ वत्स कस्माद्धि रोदिषि ।
केन वा तेऽपकृतमित्युक्त: स न्यवेदयत् ॥ ४० ॥
अनुवाद
उन्होंने मारे हुए साँप को एक ओर फेंक दिया और अपने बेटे से पूछा कि वह क्यों रो रहा है, क्या किसी ने उसे नुक़सान पहुँचाया है? यह सुनकर, बेटे ने उसे बताया कि क्या हुआ था।
He threw the dead snake aside and asked his son why it was crying? Had someone hurt it? Hearing this, the boy told him what had happened.
तात्पर्य
पिता ने मृत सर्प को अपने गले में लिपटे हुए गंभीरता से नहीं लिया। उसने उसे ऐसे ही फेंक दिया। दरअसल महाराज परीक्षित के कृत्य में कुछ भी गंभीरता से गलत नहीं था, लेकिन मूर्ख पुत्र ने इसे बहुत गंभीरता से लिया, और कलियुग के प्रभाव में वह राजा को शाप दे बैठा और इस तरह, सुखद इतिहास के एक अध्याय का अंत हो गया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥