ब्राह्मण-पुत्र ने राजा को श्राप दिया: आज से सातवें दिन तुम्हारे वंश का सबसे निकृष्ट व्यक्ति (महाराज परीक्षित) तक्षक सर्प के डसने से मर जाएगा, क्योंकि उसने मेरे पिता का अपमान करके शिष्टाचार के नियमों का उल्लंघन किया है।
That Brahmin's son cursed the king thus: On the seventh day from today, this most wretched of his lineage (Maharaja Parikshit) will be bitten by the Takshak serpent, because he has violated the rules of etiquette by insulting my father.
तात्पर्य
इस प्रकार ब्राह्मण शक्ति के दुरुपयोग की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे कलियुग में ब्राह्मण ब्राह्मण शक्तियों और संस्कृति दोनों से रहित हो गये। ब्राह्मण बालक महाराज परीक्षित को कुलंगार, या वंश का पतित समझता था परंतु तथ्यतः वह ब्राह्मण बालक स्वयं ऐसा था क्योंकि उसी से ब्राह्मण जाति शक्तिहीन हो गयी, जैसे कि सर्प जिसके जहरीले दाँत टूट जाते हैं। सर्प जब तक अपने विषैले दाँत रखता है तब तक भयानक होता है, अन्यथा वह केवल बच्चों के लिए भयानक होता है। कलियुग की शख्सियत ने पहले ब्राह्मण बालक को जीत लिया, और धीरे-धीरे अन्य जातियों को भी जीत लिया। इस प्रकार इस युग में समाज की व्यवस्था की संपूर्ण वैज्ञानिक प्रणाली एक विकृत जाति व्यवस्था का रूप धारण कर चुकी है, जिसे अब कलियुग से इसी तरह प्रभावित लोगों के एक अन्य वर्ग द्वारा उखाड़ा जा रहा है। किसी को भी विकृति के मूल कारण को देखना चाहिए और वैज्ञानिक मूल्य की जानकारी के बिना, उस व्यवस्था की यथावत निंदा करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥