कृष्णे गते भगवति शास्तर्युत्पथगामिनाम् ।
तद्भिन्नसेतूनद्याहं शास्मि पश्यत मे बलम् ॥ ३५ ॥
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण, सबों के परम शासक और देवता के जाने के बाद, हमारे रक्षक चले गए, लेकिन ये उपद्रवी फल-फूल रहे हैं। इसलिए मैं खुद इस मामले को उठाऊँगा और उन्हें सजा दूँगा। अब मेरी शक्ति को देखो।
After the departure of Lord Krishna, the supreme ruler of all, our protectors are gone, but these miscreants are flourishing. Therefore, I will take the matter in my hands and punish them. Now see my prowess.
तात्पर्य
अनुभवहीन ब्राह्मण, थोड़े से ब्रह्म-तेज से फूलकर, कलि-युग के मंत्र से प्रभावित हो गया। महाराज परीक्षित ने कलि को यहाँ पहले उल्लेखित चार स्थानों पर रहने का अधिकार दिया था, पर उसके बड़े ही कुशल शासन से कलि का व्यक्तित्व उसे दिए हुए स्थानों को शायद ही पा सका। इसलिए, कलि-युग का व्यक्तित्व अधिकार स्थापित करने के अवसर को तलाश रहा था, और भगवान की कृपा से उसने एक ब्राह्मण के घमंडी, अनुभवहीन बेटे में एक छेद पाया। वह छोटा ब्राह्मण विनाश में अपने साहस को दिखाना चाहता था, और उसकी निर्भीकता महाराज परीक्षित जैसे महान राजा को दंड देने की भी थी। वह प्रभु कृष्ण के जाने के बाद उनकी जगह लेना चाहता था। ये उन दंभियों के मुख्य संकेत हैं जो कलि-युग के प्रभाव में श्री कृष्ण की जगह लेना चाहते हैं। थोड़ी शक्ति के साथ एक दंभी भगवान का अवतार बनना चाहता है। पृथ्वी के धरातल से भगवान कृष्ण के जाने के बाद कई झूठे अवतार हुए हैं, और वे झूठी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए आम लोगों की आध्यात्मिक आज्ञाकारिता को स्वीकार करके भोली जनता को गुमराह कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में, कलि के व्यक्तित्व को इस ब्राह्मण के बेटे, श्रृंगी के माध्यम से शासन करने का अवसर मिला।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥