विप्रकीर्णजटाच्छन्नं रौरवेणाजिनेन च ।
विशुष्यत्तालुरुदकं तथाभूतमयाचत ॥ २७ ॥
अनुवाद
ऋषि ध्यान में लीन थे, उनकी काया पर मृग की खाल लपेटी हुई थी और उनके लंबे, उलझे बाल उनके सारे शरीर पर फैले हुए थे। प्यास से तड़पते हुए राजा ने उनसे पानी माँगा।
The sage, engrossed in meditation, was wrapped in a deerskin and his long matted locks were spread all over his body. The king, who had a parched palate due to thirst, asked him for water.
तात्पर्य
राजा को प्यास लगी तो ऋषि से पानी माँगा। ऐसे बड़े भक्त और राजा ने तप में लीन ऋषि से पानी माँगा, यह निश्चित ही ईश्वरीय था। अन्यथा, ऐसी अनोखी घटना घटित होने का कोई मौका ही नहीं था। इस प्रकार, महाराज परीक्षित को एक अजीब स्थिति में रखा गया ताकि धीरे-धीरे श्रीमद-भागवतम का रहस्योद्घाटन हो सके।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥