श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 18: ब्राह्मण बालक द्वारा महाराज परीक्षित को शाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.18.21 
अथापि यत्पादनखावसृष्टं
जगद्विरिञ्चोपहृतार्हणाम्भ: ।
सेशं पुनात्यन्यतमो मुकुन्दात्
को नाम लोके भगवत्पदार्थ: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण के अतिरिक्त कौन परमेश्वर कहलाने योग्य है? ब्रह्माजी ने उनके पाँव के नाखूनों से निकलनेवाले जल को इकट्ठा करके भगवान शिवजी के मस्तक पर लगाने के लिए दिया। यही जल (गंगानदी) सारे ब्रह्मांड को, यहाँ तक कि भगवान शिव को भी शुद्ध कर रहा है।
 
Who else other than Lord Krishna is worthy of being called the Supreme God? Brahma collected the water that came out of his toenails so that Lord Shiva could take it on his head. This water (river Ganga) is purifying the entire universe including Lord Shiva.
तात्पर्य
वेद साहित्य में अज्ञानी लोगों द्वारा अनेक देवों की कल्पना करना पूरी तरह से ग़लत है। भगवान एक है और उनका कोई दूसरा नहीं है, लेकिन वे स्वंय को बहुत सी तरह से विस्तारित करते हैं, और इसकी पुष्टि वेदों में की गयी है। भगवान के ऐसे विस्तार असीमित हैं, लेकिन उनमें से कुछ सजीव प्राणी हैं। सजीव प्राणी भगवान के पूर्ण विस्तारों जितने सामर्थ्यवान नहीं होते हैं, और इसलिए विस्तार दो भिन्न प्रकार के होते हैं। भगवान ब्रह्मा आम तौर पर सजीव प्राणियों में से एक होते हैं, और भगवान शिव भगवान और सजीव प्राणियों के बीच के माध्यम होते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो देवतागण भी जैसे भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव, जो सभी देवताओं में सबसे प्रमुख हैं, कभी भी ईश्वर, भगवान विष्णु के बराबर या उनसे बड़े नहीं हो सकते। सौभाग्य की देवी, लक्ष्मी, और सर्वशक्तिशाली देवता जैसे ब्रह्मा और शिव विष्णु या भगवान कृष्ण की पूजा में लगे रहते हैं; इसलिए भगवान मुकुंद (भगवान कृष्ण) से अधिक सामर्थ्यवान और कोई कौन हो सकता है जिन्हें भगवद के सर्वोच्च व्यक्तित्व के रूप में वास्तविक रूप से पुकारा जाता है? सौभाग्य की देवी, लक्ष्मी जी, भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव स्वतंत्र रूप से शक्तिशाली नहीं हैं; वे सर्वोच्च भगवान के विस्तार के रूप में शक्तिशाली हैं, और ये सभी भगवान की दिव्य प्रेममय सेवा में लगे रहते हैं, और इसी तरह सजीव प्राणी भी होते हैं। भगवान के भक्तिपूर्ण भक्तों के चार संप्रदाय हैं, और उनमें प्रमुख ब्रह्मा संप्रदाय, रुद्र संप्रदाय और श्री संप्रदाय हैं, जो क्रमशः भगवान ब्रह्मा, भगवान शिव और सौभाग्य की देवी, लक्ष्मी से सीधे उत्पन्न हुए हैं। उपर्युक्त तीन संप्रदायों के अतिरिक्त, कुमार संप्रदाय है, जो सनत-कुमार से उत्पन्न हुआ है। सभी चार मूल संप्रदाय अभी भी भगवान की दिव्य सेवा में पूरी तरह से लगे हुए हैं, और वे सभी घोषणा करते हैं कि भगवान कृष्ण, मुकुंद, ईश्वर, भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व हैं, और कोई अन्य व्यक्तित्व उनके बराबर या उनसे बड़ा नहीं है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)