त्वं वा मृणालधवल: पादैर्न्यून: पदा चरन् ।
वृषरूपेण किं कश्चिद् देवो न: परिखेदयन् ॥ ७ ॥
अनुवाद
तब उन्होंने (महाराज परीक्षित ने) बैल से पूछा: अरे, तुम कौन हो? क्या तुम श्वेत कमल जैसा धवल बैल हो या कोई देवता हो? तुम अपने तीन पैर क्यों खो बैठे हो और केवल एक पैर पर क्यों चल रहे हो? क्या तुम बैल का रूप धरे कोई देवता हो, जो हमें इस तरह कष्ट पहुँचा रहे हो?
Then he (Maharaj Parikshit) asked the bull: Hey, who are you? Are you a white lotus-like bull or a god? You have lost your three legs and are walking on only one leg. Are you a god in the form of a bull, who is causing us such suffering?
तात्पर्य
महाराज परीक्षित तक के समय तक, कोई भी गाय और बैल की दयनीय स्थिति की कल्पना नहीं कर सकता था। इसलिए, महाराज परीक्षित इस तरह के भयानक दृश्य को देखकर चकित रह गए। उन्होंने पूछताछ की कि क्या बैल एक देवता नहीं है जो गाय और बैल के भविष्य को इंगित करने के लिए ऐसी दयनीय स्थिति में आते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥