सर्वश्रेष्ठ भाग्यशाली सम्राट महाराज परीक्षित, जिन्हें महाराज युधिष्ठिर ने जब वे वन जा रहे थे तब हस्तिनापुर का राज्य सौंपा था, अब कुरुवंशी राजाओं के कामों से प्रख्यात होकर अत्यंत सफलतापूर्वक संसार पर राज्य कर रहे हैं।
That most fortunate Emperor Maharaja Parikshit, to whom Maharaja Yudhishthira had handed over the kingdom of Hastinapur while going to the forest, is now ruling the world very successfully, having gained fame through the deeds of the Kuru dynasty kings.
तात्पर्य
हिंदी -पाठ: नैमिषारण्य के ऋषियों द्वारा किये गए लंबे यज्ञ महाराज परीक्षित के देहावसान के कुछ समय बाद ही शुरू हुए थे। यज्ञ एक हजार साल तक जारी रहना था और यह समझा जाता है कि शुरुआत में भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलदेव के कुछ समकालीन भी उस यज्ञ स्थल पर गए थे। कुछ जानकारों के अनुसार वर्तमान काल का उपयोग बीते समय के साथ निकटतम अंतराल को दर्शाने के लिए भी किया जाता है। उस अर्थ में यहाँ महाराज परीक्षित के शासनकाल के लिए वर्तमान काल का प्रयोग किया गया है। किसी निरंतर चलने वाले तथ्य के लिए भी वर्तमान काल का उपयोग किया जा सकता है। महाराज परीक्षित के सिद्धांतों को अभी भी जारी रखा जा सकता है और यदि अधिकारियों में दृढ़ संकल्प हो तो मानव समाज को अभी भी सुधारा जा सकता है। यदि हम महाराज परीक्षित की तरह कार्रवाई करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं तो हम अभी भी कलिकाल रूपी व्यक्तित्व द्वारा शुरू की गई सभी अनैतिक गतिविधियों को राज्य से मिटा सकते हैं। उन्होंने कलियुग के लिए कुछ स्थान आबंटित किए थे, लेकिन वास्तव में कलियुग को दुनिया में ऐसे स्थान नहीं मिल सके क्योंकि महाराज परीक्षित इस बात के लिए सख्त रूप से सतर्क थे कि जुआ, मदिरापान, वेश्यावृत्ति और पशुवध के लिए कोई जगह न हो। आधुनिक प्रशासक राज्य से भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन मूर्ख होने के कारण, वे नहीं जानते कि यह कैसे करना है। वे जुआ घरों, शराब और अन्य नशीली दवाओं के घरों, वेश्यालयों, होटल वेश्यावृत्ति और सिनेमा घरों के लिए लाइसेंस जारी करना चाहते हैं तथा हर प्रकार के व्यवहार में झूठ का सहारा लेना चाहते हैं, यहाँ तक कि अपने स्वयं के व्यवहार में भी और वे उसी समय राज्य से भ्रष्टाचार को खत्म करना चाहते हैं। वे ईश्वर की चेतना के बिना ईश्वर का राज्य चाहते हैं। दो विरोधी मामलों को कैसे संयोजित किया जा सकता है? यदि हम राज्य से भ्रष्टाचार को दूर भगाना चाहते हैं तो हमें सबसे पहले समाज को धर्म के सिद्धांतों, अर्थात् तप, स्वच्छता, दया और सच्चाई को स्वीकार करने के लिए संगठित करना होगा और परिस्थितियों को अनुकूल बनाने के लिए हमें जुआ, मदिरापान, वेश्यावृत्ति और झूठ के सभी स्थानों को बंद करना होगा। ये श्रीमद्भागवतम् के पृष्ठों से कुछ व्यावहारिक शिक्षाएँ हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥