श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 17: कलि को दण्ड तथा पुरस्कार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.17.4 
पप्रच्छ रथमारूढ: कार्तस्वरपरिच्छदम् ।
मेघगम्भीरया वाचा समारोपितकार्मुक: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
धनुष-बाण से सुसज्जित तथा सोने से जड़ित रथ पर बैठे, महाराज परीक्षित ने उससे (शूद्र से) बादलों जैसी गड़गड़ाहट करने वाली गंभीर वाणी में कहा।
 
Armed with bow and arrows and seated on a gold-studded chariot, Maharaja Pariksit spoke to him (the Sudra) in a deep voice that roared like a cloud.
तात्पर्य
एक प्रशासनिक मुखिया या महाराजा परीक्षित जैसे राजा, पूर्ण राजसी अधिकार के साथ, शरारती लोगों को दंडित करने के लिए हथियारों से सुसज्जित, कलयुग के एजेंटों को चुनौती दे सकते हैं। तभी नीच युग का मुकाबला करना संभव होगा। और ऐसे मजबूत कार्यकारी प्रमुखों की अनुपस्थिति में, हमेशा शांति भंग होती है। एक नीच जनता के प्रतिनिधि के रूप में चुने गए शो-बॉटल कार्यकारी प्रमुख, महाराजा परीक्षित जैसे एक मजबूत राजा के बराबर नहीं हो सकते। शाही आदेश की पोशाक या शैली की कोई गणना नहीं होती है। एक की गिनती की जाती है जो क्रियाएँ हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)