श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 17: कलि को दण्ड तथा पुरस्कार  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.17.34 
यस्मिन् हरिर्भगवानिज्यमान
इज्यात्ममूर्तिर्यजतां शं तनोति ।
कामानमोघान् स्थिरजङ्गमाना-
मन्तर्बहिर्वायुरिवैष आत्मा ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
सभी बलिदान समारोहों में, चाहे कभी कभी देवता की आराधना की जाये, लेकिन पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान को इसलिए पूजा जाता है क्योंकि वे प्रत्येक के अन्तरात्मा हैं और वायु के समान भीतर और बाहर विद्यमान रहते हैं। इस प्रकार केवल वही हैं जो पूजा करने वाले का सम्पूर्ण कल्याण करते हैं।
 
In all yagna festivals, though sometimes some deity is worshiped, the Supreme Personality of Godhead is worshiped because He is the inner soul of everyone and exists like the air inside and outside. Thus it is He alone who brings about the complete welfare of the worshipper.
तात्पर्य
यह तो देखा गया है कि इंद्र और चंद्र जैसे देवताओं की पूजा की जाती है और यज्ञों में बलि दी जाती है, लेकिन ऐसे सभी यज्ञों का फल उस पूजने वाले को सर्वोच्च प्रभु ही देते हैं और उस पूजने वाले को सभी कल्याण वही देते हैं। पूज्य होने के बाद भी देवता प्रभु की सहमति के बिना कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि प्रभु सभी के, चर और अचर के, अन्तर्यामी हैं।

भगवद-गीता (9.23) में स्वयं भगवान इस बात की पुष्टि इस प्रकार करते हैं:

येऽप्यन्यदेवता भक्ताः

यजन्ते श्रद्धयान्विताः

तेऽपि मामेव कौन्तेय

यजन्त्यविधि-पूर्वकम्

"हे कुन्तीपुत्र! मनुष्य दूसरे देवताओं के लिए जो भी बलि देता है, वह वास्तव में मेरे लिए ही होता है, लेकिन इसे सही समझ के बिना अर्पित किया जाता है।"

तथ्य यह है कि परमेश्वर एक हैं, उनका कोई दूसरा नहीं है। स्वयं प्रभु के अतिरिक्त कोई ईश्वर नहीं है। इस प्रकार परमेश्वर सदा भौतिक सृष्टि से परे हैं। लेकिन बहुत से लोग सूर्य, चंद्रमा और इंद्र जैसे देवताओं की पूजा करते हैं, जो कि केवल परमेश्वर के भौतिक प्रतिनिधि हैं। ये देवता परमेश्वर के अप्रत्यक्ष, गुणात्मक प्रतिनिधि हैं। हालाँकि, एक विद्वान व्यक्ति या भक्त जानता है कि कौन क्या है। इसलिए वह सीधे परमेश्वर की पूजा करता है और भौतिक, गुणात्मक प्रतिनिधियों द्वारा विचलित नहीं होता है। जो लोग इतने विद्वान नहीं हैं, वे ऐसे गुणात्मक, भौतिक प्रतिनिधियों की पूजा करते हैं, लेकिन उनकी पूजा अनियमित होती है क्योंकि यह नियमित नहीं है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)