अथवा देवमायाया नूनं गतिरगोचरा ।
चेतसो वचसश्चापि भूतानामिति निश्चय: ॥ २३ ॥
अनुवाद
इस प्रकार ये निष्कर्ष निकलता है कि भगवान् की शक्तियाँ मनुष्य की समझ से परे हैं। कोई भी न तो अपनी बुद्धि के माध्यम से और न ही शब्दों के चातुर्य के ज़रिए उनका अनुमान नहीं लगा सकता।
Thus the conclusion is that God's powers are inconceivable. No one can estimate them either by mental contemplation or by clever words.
तात्पर्य
यह प्रश्न उठ सकता है कि किसी भक्त को अभिनेता की पहचान करने से क्यों बचना चाहिए, यद्यपि वह निश्चित रूप से जानता है कि भगवान ही हर चीज के परम कर्ता हैं। परम कर्ता को जानकर, किसी को भी वास्तविक कर्ता के बारे में स्वयं को अनजान नहीं रखना चाहिए। इस संदेह का उत्तर देने के लिए जवाब है कि भगवान भी सीधे जिम्मेदार नहीं हैं, क्योंकि सब कुछ उनकी नियुक्त माया-शक्ति या भौतिक ऊर्जा द्वारा किया जाता है। भौतिक ऊर्जा हमेशा भगवान के सर्वोच्च अधिकार के बारे में संदेह पैदा करती रहती है। धर्म का व्यक्तित्व पूरी तरह से जानता था कि सर्वोच्च भगवान की मंजूरी के बिना कुछ भी नहीं हो सकता है, और फिर भी वह भ्रामक ऊर्जा से संदेह में डाल दिया गया था, और इस प्रकार वह परम कारण का उल्लेख करने से बचना चाहता था। यह संदेह काली और भौतिक ऊर्जा दोनों के संदूषण के कारण था। कलियुग का पूरा वातावरण भ्रामक ऊर्जा द्वारा बढ़ाया जाता है, और मापन का अनुपात अकथनीय है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥