श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 17: कलि को दण्ड तथा पुरस्कार  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.17.2 
वृषं मृणालधवलं मेहन्तमिव बिभ्यतम् ।
वेपमानं पदैकेन सीदन्तं शूद्रताडितम् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
वह बैल एक सफ़ेद कमल के फूल की तरह सफ़ेद था। वह उस शूद्र से बहुत डरता था जो उसे मार रहा था। वह इतना डरा हुआ था कि एक ही पैर पर खड़ा काँप रहा था और पेशाब कर रहा था।
 
The bull was so white as if it was a white lotus flower. He was extremely scared of the Shudra who was beating him. He was so scared that he was standing on one leg, trembling and urinating.
तात्पर्य
कलियुग का अगला लक्षण यह है कि धर्म के सिद्धांत, जो सफेद कमल के फूल की तरह बिल्कुल सफेद हैं, पर युग के अशिक्षित शूद्रों द्वारा हमला किया जाएगा। वे ब्राह्मण या क्षत्रिय पूर्वजों के वंशज हो सकते हैं, लेकिन कलियुग में, वैदिक ज्ञान की पर्याप्त शिक्षा और संस्कृति की कमी के कारण, ऐसी शूद्र जैसी आबादी धर्म के सिद्धांतों की अवहेलना करेगी और धार्मिक रूप से संपन्न व्यक्ति ऐसे लोगों से भयभीत होंगे। वे खुद को किसी भी धार्मिक सिद्धांत का अनुयायी घोषित नहीं करेंगे, और कलियुग में ही धर्म के निर्दोष बैल को मारने के लिए कई "इस्म" और पंथ उभरेंगे। राज्य को धर्मनिरपेक्ष या किसी विशेष धार्मिक सिद्धांत के बिना घोषित किया जाएगा, और इसके परिणामस्वरूप धर्म के सिद्धांतों के प्रति पूर्ण उदासीनता होगी। साधु, शास्त्र और गुरु के सम्मान के बिना नागरिक अपनी मर्जी से कार्य करने के लिए स्वतंत्र होंगे। एक पैर पर खड़ा बैल इंगित करता है कि धर्म के सिद्धांत धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। धार्मिक सिद्धांतों का टुकड़ा अस्तित्व भी इतनी सारी बाधाओं से शर्मिंदा होगा जैसे कि किसी भी समय गिरने की कांपती स्थिति में।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)