जो उद्दंड प्राणी निरपराधियों को सता कर पाप करता है, उसे मैं सीधे उखाड़ फेंकूँगा, चाहे वह स्वर्ग का ही निवासी हो और कवच एवं आभूषणों से सजा हुआ ही क्यों न हो।
The arrogant person who commits crime by persecuting the innocent will be uprooted by me, even if he is a resident of heaven adorned with armlets and other ornaments.
तात्पर्य
स्वर्ग-राज्य निवासी दीर्घजीवी होने के कारण जो कि मनुष्य की जीवन अवधि से अत्यधिक अधिक है अमर या मृत्युहीन कहलाते हैं। मनुष्य के लिए, जिसकी जीवन अवधि अधिकतम एक सौ वर्ष होती है, लाखों वर्षों में फैली हुई जीवन अवधि निश्चित रूप से मृत्युहीन मानी जाती है। उदाहरण के लिए, भगवद गीता से हम सीखते हैं कि ब्रह्मलोक ग्रह पर एक दिन की अवधि 4,300,000 × 1,000 सौर वर्ष मानी जाती है। इसी तरह, अन्य स्वर्गीय ग्रहों में एक दिन इस ग्रह के छह महीने के बराबर होता है, और वहां रहने वालों को अपने दस लाख वर्षों का जीवन मिलता है। इसलिए, सभी उच्च ग्रहों में, चूंकि जीवन अवधि मानव की तुलना में कहीं अधिक है, निवासियों को कल्पना द्वारा मृत्युहीन कहा जाता है, हालांकि वास्तव में भौतिक ब्रह्मांड के भीतर कोई भी मृत्युहीन नहीं है। महाराजा परीक्षित स्वर्ग के ऐसे निवासियों को भी चुनौती देते हैं, यदि वे निरापराधों को यातना देते हैं। इसका अर्थ यह है कि राज्य का कार्यकारी प्रमुख महाराज परीक्षित जितना ही मजबूत होना चाहिए जिससे कि वह सबसे मजबूत अपराधियों को दंडित करने के लिए दृढ़ हो। यह एक राज्य कार्यकारी प्रमुख का सिद्धांत होना चाहिए कि भगवान की संहिताओं का अपराधी हमेशा दंडित किया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥