कोऽवृश्चत् तव पादांस्त्रीन् सौरभेय चतुष्पद ।
मा भूवंस्त्वादृशा राष्ट्रे राज्ञां कृष्णानुवर्तिनाम् ॥ १२ ॥
अनुवाद
महाराज परीक्षित ने बार-बार बैल को संबोधित करते हुए पूछा: हे सुरभि के बेटे, आपके तीनों पैर किसने काटे हैं? वे राजा जिनका प्रभु श्री कृष्ण के नियमों पर विश्वास है, उनके राज्य में आपसे दुखी कोई नहीं है।
He (Maharaja Pariksit) repeatedly addressed the bull and asked him: O son of Surabhi, who has cut off your three feet? In the kingdom of those kings who are obedient to the rules of the Supreme Personality of Godhead, Krishna, no one is as miserable as you are.
तात्पर्य
सभी राजाओं या राज्य के कार्यकारी प्रमुखों को भगवान कृष्ण की संहिताओं (आम तौर पर भगवद गीता और श्रीमद-भागवतम) का ज्ञान होना चाहिए और भौतिक परिस्थितियों के सभी दुखों का अंत करने के लिए, जो मानव जीवन का मिशन है, कार्य करना चाहिए। जो भगवान कृष्ण की संहिताओं को जानता है वह बिना किसी कठिनाई के इस अंत को प्राप्त कर सकता है। भगवद गीता में, एक सारांश में, हम ईश्वरत्व की संहिताओं को समझ सकते हैं, और श्रीमद-भागवतम में उन्हीं संहिताओं को और अधिक विस्तार से समझाया गया है। एक ऐसे राज्य में जहां कृष्ण की संहिताओं का पालन किया जाता है, कोई भी दुखी नहीं होता है। जहां ऐसी संहिताओं का पालन नहीं किया जाता है, पहला संकेत यह होता है कि धर्म के प्रतिनिधि के तीन पैर काट दिए जाते हैं, और इससे सभी दुखों का अनुसरण होता है। जब कृष्ण व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे, तब कृष्ण की संहिताओं का निर्विवाद रूप से पालन किया जा रहा था, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में ऐसी संहिताएँ श्रीमद-भागवतम के पृष्ठों में उन अंधे व्यक्तियों के मार्गदर्शन के लिए प्रस्तुत की जाती हैं जो सभी मामलों में शीर्ष पर होते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥