श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 16: परीक्षित ने कलियुग का सत्कार किस तरह किया  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.16.24 
इदं ममाचक्ष्व तवाधिमूलं
वसुन्धरे येन विकर्शितासि ।
कालेन वा ते बलिनां बलीयसा सुरार्चितं
किं हृतमम्ब सौभगम् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
मां, आप सभी धन-संपत्ति की देवी हैं। कृपया मुझे अपने उन कष्टों का मूल कारण बताएं, जिससे आप इतनी दुर्बल अवस्था को प्राप्त हुई हैं। मुझे लगता है कि सबसे बलवानों को भी जीत लेने वाला प्रबल काल ने देवताओं द्वारा भी पूजनीय आपके सभी सौभाग्य को छीन लिया है।
 
O mother, you are the treasure of all wealth. Please tell me the root cause of your troubles, due to which you have reached this weak state. I think that the strong time, which conquers even the strongest, has snatched away all your good fortunes, which are revered by the gods.
तात्पर्य
प्रभु की कृपा से प्रत्येक और हर ग्रह पूरी तरह से सुसज्जित रूप में बनाया गया है। इसलिए न केवल यह पृथ्वी अपने निवासियों के रखरखाव के लिए सभी संपदाओं से पूर्ण रूप से सुसज्जित है, बल्कि जब प्रभु पृथ्वी पर अवतरित होते हैं तो पूरी पृथ्वी सभी प्रकार के वैभव से इतनी समृद्ध हो जाती है कि स्वर्ग के निवासी भी इसे पूरे स्नेह से पूजते हैं। लेकिन प्रभु की इच्छा से, पूरी पृथ्वी को एक साथ बदला जा सकता है। वह अपनी मधुर इच्छा से एक काम कर सकता है और पूर्ववत कर सकता है। इसलिए किसी को भी अपने आप को आत्मनिर्भर या प्रभु से स्वतंत्र नहीं समझना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)