साक्षात धर्म, बैल के रूप में विचरण कर रहा था। उसे गाय के रूप में साक्षात पृथ्वी मिली, जो ऐसी माता के समान शोकग्रस्त दिखाई पड़ी, जो अपना पुत्र खो चुकी हो। उसकी आँखों में आँसू थे और उसके शरीर का सौंदर्य उड़ गया था। धर्म ने पृथ्वी से इस प्रकार प्रश्न किया।
Dharma, the Supreme Being, was roaming around in the form of a bull. He met the Earth in the form of a cow, who looked as grief-stricken as a mother who has lost her son. There were tears in her eyes and the beauty of her body had vanished. Dharma questioned the Earth in this manner.
तात्पर्य
सांड नैतिक सिद्धांत का प्रतीक है और गाय पृथ्वी का प्रतिनिधित्व करती है। जब सांड और गाय आनंदित मनोदशा में होते हैं, तो यह समझा जाना चाहिए कि संसार के लोग भी आनंदित मनोदशा में हैं। कारण यह है कि सांड कृषि क्षेत्र में अनाज के उत्पादन में मदद करता है और गाय दूध देती है, जो समग्र खाद्य मूल्यों का चमत्कार है। इसलिए, मानव समाज इन दो महत्वपूर्ण पशुओं की बहुत सावधानी से देखभाल करता है ताकि वे हर जगह प्रसन्नतापूर्वक भ्रमण कर सकें। लेकिन इस समय, कलियुग में, सांड और गाय दोनों का वध किया जा रहा है और मनुष्यों के एक वर्ग द्वारा खाद्य पदार्थ के रूप में खाया जा रहा है जो ब्राह्मण संस्कृति को नहीं जानते हैं। सांड और गाय को पूरे मानव समाज की भलाई के लिए केवल ब्राह्मण संस्कृति को सभी सांस्कृतिक मामलों की सर्वोच्च पूर्णता के रूप में फैलाकर सुरक्षित किया जा सकता है। ऐसी संस्कृति की उन्नति से, समाज का मनोबल ठीक से बना रहता है और इसलिए शांति और समृद्धि भी बाहरी प्रयास के बिना प्राप्त की जाती है। जब ब्राह्मण संस्कृति बिगड़ती है, तो गाय और सांड के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और परिणामी कार्य निम्नलिखित लक्षणों से प्रमुख होते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥