यत्सन्निधावहमु खांडवमग्नयेऽदा-
मिन्द्रं च सामरगणं तरसा विजित्य ।
लब्धा सभा मयकृताद्भुतशिल्पमाया
दिग्भ्योऽहरन्नृपतयो बलिमध्वरे ते ॥ ८ ॥
अनुवाद
क्योंकि वह मेरे पास था, इसलिए मेरे लिए बहुत ही चतुराई से स्वर्ग के शक्तिशाली राजा इंद्रदेव को उनके देव-पार्षदों सहित जीत पाना संभव हुआ और इस तरह अग्निदेव खाण्डव वन को जला सके। उन्हीं की कृपा से, मय नामक असुर को जलते हुए खाण्डव वन से बचाया जा सका। इस तरह हम अत्यन्त आश्चर्यजनक शिल्प-कला वाले सभाभवन का निर्माण कर सके, जहाँ राजसूय-यज्ञ के समय सारे राजकुमार एकत्र हो सके और आपको आदर प्रदान कर सके।
Because He was near me, it was possible for me to very skilfully defeat the mighty King of heaven, Indra, along with his celestial council, and thus Agnidev could destroy the Khandava forest. By His grace, the demon named Maya could be saved from the burning Khandava forest. In this way we could construct a most marvelous architectural hall, where all the princes could assemble and pay their respects to You during the Rajasuya sacrifice.
तात्पर्य
राक्षस माया दानव खाण्डव वन का निवासी था, और जब खाण्डव वन में आग लगाई गई, उसने अर्जुन से सुरक्षा मांगी। अर्जुन ने उसकी जान बचाई, और इसके परिणामस्वरूप राक्षस कृतज्ञ महसूस कर रहा था। उसने पाण्डवों के लिए एक अद्भुत सभा भवन का निर्माण करके ऋण चुकाया, जिसने सभी राज्य राजकुमारों का असाधारण ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने पाण्डवों की अलौकिक शक्ति महसूस की, और इस तरह बिना किसी शिकायत के वे सभी सम्राट के सामने हाजिर हुए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राक्षसों के पास भौतिक अजूबे बनाने के लिए अद्भुत और अलौकिक शक्तियां होती हैं। लेकिन वे हमेशा समाज के लिए परेशान करनेवाले तत्व ही होते हैं। आधुनिक राक्षस हानिकारक भौतिक वैज्ञानिक हैं जो समाज में अशांति फैलाने के लिए कुछ भौतिक चमत्कार बनाते हैं। उदाहरण के लिए, परमाणु हथियारों के निर्माण ने मानव समाज में कुछ दहशत पैदा कर दी है। माया भी ऐसा ही एक भौतिकवादी था, और वह ऐसी अद्भुत चीजें बनाने की कला जानता था। और फिर भी भगवान कृष्ण उसका वध करना चाहते थे। जब वह भगवान कृष्ण की आग और पहिये दोनों से पीछा किया गया तो, वह अर्जुन जैसे एक भक्त की शरण में चला गया, जिसने उसे भगवान श्री कृष्ण की आग के प्रकोप से बचाया। इसलिए भक्त प्रभु से अधिक दयालु होते हैं, और भक्ति सेवा में एक भक्त की दया प्रभु की दया से अधिक मूल्यवान होती है। जैसे ही दोनों ने देखा कि राक्षस को अर्जुन जैसे भक्त ने शरण दी है, वैसे ही आग और प्रभु दोनों ने उस राक्षस का पीछा करना बंद कर दिया। वह राक्षस, अर्जुन के प्रति कृतज्ञ महसूस करते हुए, उसके लिए अपनी कृतज्ञता दिखाने के लिए कुछ सेवा करना चाहता था, लेकिन अर्जुन ने बदले में उससे कुछ भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। हालाँकि, माया द्वारा एक भक्त की शरण लेने से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने उसे एक अद्भुत सभा भवन का निर्माण करके राजा युधिष्ठिर को सेवा प्रदान करने को कहा। प्रक्रिया यह है कि भक्त की कृपा से भगवान की दया प्राप्त होती है, और भगवान की दया से भगवान के भक्त की सेवा करने का मौका मिलता है। भीमसेन का गदा भी माया दानव का एक उपहार था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥