पाण्डु-पुत्रों का भगवद्धाम के लिए प्रस्थान का यह विषय अत्यंत शुभ और पवित्र है। कोई भी श्रद्धा से इस कथा को सुनता है, वह निश्चित रूप से भगवद्भक्ति को प्राप्त करके जीवन के परम लक्ष्य तक पहुँच जाता है।
This topic of departure of Pandu's sons for the ultimate goal of life, the abode of God, is very auspicious and most sacred. Therefore, whoever listens to this story with devotion, he definitely attains the supreme accomplishment of life, devotion to God.
तात्पर्य
श्रीमद्-भागवतम् भगवान श्रीकृष्ण और उनके भक्तों अर्थात पाण्डवों के चरित्र वाला कथन है। भगवान और उनके भक्तों का कथन सम्पूर्ण है, और इसीलिए इसे श्रद्धा के साथ सुनने का अर्थ है भगवान और उनके सखाओं के साथ संग करना। श्रीमद्-भागवतम को सुनने की क्रिया से जीवन की सर्वोच्च सिद्धि पाई जा सकती है, अर्थात भगवान के पास अपने घर वापस जाना, और यह कभी विफल नहीं होता।
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध एक के अंतर्गत पंद्रहवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥