सख्यं मैत्रीं सौहृदं च सारथ्यादिषु संस्मरन् ।
नृपमग्रजमित्याह बाष्पगद्गदया गिरा ॥ ४ ॥
अनुवाद
भगवान कृष्ण और उनके आशीर्वाद, शुभकामनाओं, घनिष्ठ पारिवारिक रिश्तों और उनके रथ चलाने की याद करके, अर्जुन का गला रुँध गया और वह भारी सांस लेता हुआ बोलने लगा।
Remembering Lord Krishna and His good wishes and blessings, close family relationship and His driving the chariot, Arjuna's throat became choked and he began to speak with heavy breaths.
तात्पर्य
परम जीव, अपने शुद्ध भक्त के साथ सभी संबंधों में पूर्ण है। श्री अर्जुन भगवान के विशिष्ट शुद्ध भक्तों में से एक हैं जो भाईचारे के रिश्ते में प्रत्युत्तर देते हैं, और अर्जुन के साथ भगवान का व्यवहार सर्वोच्च पूर्ण व्यवस्था की मित्रता का प्रदर्शन है। वह न केवल अर्जुन के शुभचिंतक थे, बल्कि वास्तव में एक हितैषी थे, और इसे और भी पूर्ण बनाने के लिए भगवान ने सुभद्रा का विवाह उनके साथ करके उन्हें पारिवारिक रिश्ते में बाँध दिया। और सबसे बढ़कर, भगवान अपने मित्र को युद्ध के जोखिमों से बचाने के लिए अर्जुन के सारथी बनने के लिए तैयार हो गए, और जब भगवान ने पाण्डवों को दुनिया पर शासन करने के लिए स्थापित किया तो भगवान वास्तव में खुश हो गए। अर्जुन ने इन सबको एक के बाद एक याद किया, और इस तरह वह ऐसे विचारों से अभिभूत हो गया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥