इसके पश्चात उन्होंने हस्तिनापुर की राजधानी में अपने पौत्र को, जो प्रशिक्षित था और उन्हीं के समान सभी भूमि पर शासन करने योग्य था, समुद्र से घिरी हुई सारी भूमि के सम्राट और स्वामी के रूप में सिंहासनारूढ़ किया।
Thereafter, in his capital at Hastinapura, he placed his grandson, who was trained and as capable as himself, on the throne, as the lord and emperor of all the lands surrounded by the sea.
तात्पर्य
समुद्रों से घिरी हुई पृथ्वी पर स्थित सारी भूमि हस्तिनापुर के राजा के अधीन थी। महाराज युधिष्ठिर ने अपने पौत्र महाराज परीक्षित को राज्य प्रशासन में प्रशिक्षित किया, जो कि समान रूप से योग्य थे, जो कि नागरिकों के प्रति राजा के दायित्वों के सन्दर्भ में थे। इस प्रकार, परीक्षित को भगवान के पास प्रस्थान करने से पहले महाराज युधिष्ठिर के सिंहासन पर बिठाया गया था। महाराज परीक्षित के संदर्भ में, उपयोग किए गए विशिष्ट शब्द, विनयिनम महत्वपूर्ण है। हस्तिनापुर का राजा, कम से कम महाराज परीक्षित के समय तक, दुनिया के सम्राट के रूप में क्यों स्वीकार किया गया था? इसका एक ही कारण था कि सम्राट के अच्छे प्रशासन के कारण दुनिया के लोग खुश थे। नागरिकों की खुशी अनाज, फल, दूध, जड़ी-बूटियां, कीमती पत्थर, खनिज और लोगों की जरूरत की हर चीज जैसे प्राकृतिक उत्पादों के पर्याप्त उत्पादन के कारण थी। वे सभी शारीरिक कष्टों, मन की चिंताओं और प्राकृतिक घटनाओं और अन्य जीवित प्राणियों से होने वाले व्यवधानों से भी मुक्त थे। क्योंकि हर कोई हर तरह से खुश था, इसलिए कोई नाराजगी नहीं थी, हालाँकि राजनीतिक कारणों और वर्चस्व के लिए कभी-कभी राज्य राजाओं के बीच लड़ाइयां होती थीं। प्रत्येक को जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित किया गया था, और इसलिए लोग भी इतने प्रबुद्ध थे कि तुच्छ बातों पर झगड़ा नहीं करते थे। कलियुग का प्रभाव धीरे-धीरे राजाओं और नागरिकों दोनों के अच्छे गुणों को नष्ट करता गया, और इसलिए शासक और शासित के बीच एक तनावपूर्ण स्थिति विकसित हुई, लेकिन फिर भी शासक और शासित के बीच असमानता के इस युग में भी, आध्यात्मिक भावना और भगवान की चेतना हो सकती है। यह एक विशेषाधिकार है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥