अजन्मे सर्वोपरि भगवान श्रीकृष्ण ने यदुवंश के सदस्यों से अपने-अपने शरीर त्याग करवा दिए और इस तरह उन्होंने पृथ्वी के भार को उतार दिया। यह कार्य काँटे को काँटे से निकालने के समान था, परंतु नियंत्रक की दृष्टि में दोनों समान ही हैं।
Above all, the unborn Lord Krishna caused the members of the Yadu clan to give up their bodies and thus relieved the burden of the earth. This task was like removing a thorn with another thorn, although for the controller both are the same.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर बताते हैं कि नैमिषारण्य में सूत गोस्वामी से श्रीमद-भागवतम सुन रहे शौनक जैसे ऋषि और अन्य लोग भगवान के नशें की मदहोशी में मरने के बारे में सुनकर खुश नहीं थे। उन्हें इस मानसिक पीड़ा से राहत देने के लिए, सूत गोस्वामी ने उन्हें आश्वासन दिया कि भगवान ने यादवों को अपने शरीर छोड़ने पर मजबूर किया जिससे उन्हें दुनिया के बोझ को खत्म करना पड़ा। भगवान और उनके शाश्वत साथी दुनिया के बोझ को मिटाने में प्रशासनिक देवताओं की मदद करने के लिए पृथ्वी पर प्रकट हुए। इसलिए उन्होंने कुछ गोपनीय देवताओं को यादव परिवार में प्रकट होने और अपने महान मिशन में उनकी सेवा करने के लिए बुलाया। मिशन पूरा होने के बाद, देवताओं ने नशे की मदहोशी में आपस में लड़कर भगवान की इच्छा से अपने स्थूल शरीर को छोड़ दिया। देवता सोम-रस पेय पीने के आदी हैं, और इसलिए शराब और नशा पीना उनके लिए कोई अनजान बात नहीं है। कभी-कभी नशे में धुत होने के कारण वे मुसीबत में पड़ जाते थे। एक बार कुबेर के पुत्र नशे में होने के कारण नारद के कोप में आ गए, लेकिन बाद में उन्होंने भगवान श्री कृष्ण की कृपा से अपने मूल रूप को पुनः प्राप्त कर लिया। हमें यह कहानी दसवें स्कंध में मिलेगी। परमेश्वर के लिए, दोनों असुर और देवता समान हैं, लेकिन देवता भगवान के आज्ञाकारी होते हैं, जबकि असुर नहीं होते हैं। इसलिए, एक और कांटे से कांटा निकालने का उदाहरण बिल्कुल उपयुक्त है। एक काँटा, जो भगवान के पैर में चुभता है, निश्चित रूप से भगवान को परेशान करता है, और दूसरा काँटा, जो परेशान करने वाले तत्वों को निकालता है, निश्चित रूप से भगवान को सेवा देता है। इसलिए भले ही प्रत्येक जीव भगवान का एक अंश है, फिर भी जो भगवान को चुभता है उसे असुर कहा जाता है, और जो भगवान का स्वेच्छा से सेवक है उसे देवता या देवता कहा जाता है। भौतिक दुनिया में देवता और असुर हमेशा लड़ते रहते हैं, और देवताओं को हमेशा भगवान द्वारा असुरों के हाथों से बचाया जाता है। दोनों भगवान के नियंत्रण में हैं। दुनिया दो प्रकार के जीवों से भरी हुई है, और दुनिया में जब भी ऐसी आवश्यकता होती है, भगवान का मिशन हमेशा देवताओं की रक्षा करना और असुरों को नष्ट करना होता है, और उन दोनों के साथ अच्छा करना होता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥