अर्जुन से यदुवंश के नाश और भगवान कृष्ण के अंतर्धान होने का हाल सुनकर कुन्ती ने एकाग्रचित्त होकर परमेश्वर की भक्ति में अपना मन लगा दिया और इस प्रकार संसार के चक्र से मुक्ति प्राप्त कर ली।
Hearing of the destruction of the Yadu dynasty and the disappearance of Lord Krishna from Arjuna, Kunti devoted herself whole-heartedly to the devotional service of the transcendental Lord and thus attained liberation from the cycle of life and death.
तात्पर्य
सूर्य का अस्त होना, सूर्य के अंत होने का अंदाज़ा नहीं देता है। इसका अर्थ है कि सूर्य हमारी नज़र से ओझल है। इसी तरह, एक विशेष ग्रह या ब्रह्मांड पर भगवान के मिशन की समाप्ति का अर्थ केवल इतना है कि वह हमारी दृष्टि से ओझल है। यादव वंश का अंत भी इसका अर्थ नहीं रखता की वह मिट गया है। यह लॉर्ड के साथ-साथ हमारी दृष्टि से गायब हो जाता है। महाराजा युधिष्ठिर ने गॉडहेड वापस जाने का फैसला किया, तो कुंती ने भी यही फैसला किया, और इस तरह वह अपने आप को भगवान की भक्ति सेवा में पूरी तरह से समर्पित कर दिया, जो इस वर्तमान भौतिक शरीर को छोड़ने के बाद गॉडहेड में वापस जाने के लिए एक पासपोर्ट की गारंटी देता है। भगवान के लिए भक्ति सेवा की शुरुआत वर्तमान शरीर को आध्यात्मिक बनाने की शुरुआत है, और इस तरह भगवान का एक अलंकृत भक्त वर्तमान शरीर में सभी भौतिक संपर्कों को खो देता है। ईश्वर का निवास कोई मिथक नहीं है, जैसा कि अविश्वासी या अज्ञानी लोग सोचते हैं, लेकिन कोई भी भौतिक साधनों जैसे स्पुतनिक या स्पेस कैप्सूल के द्वारा वहां नहीं पहुंच सकता है। लेकिन एक निश्चित रूप से इस वर्तमान शरीर को छोड़ने के बाद वहां पहुंच सकता है, और भक्ति सेवा का अभ्यास करके गॉडहेड में वापस जाने के लिए खुद को तैयार करना चाहिए। जो गॉडहेड में वापस जाने के लिए पासपोर्ट की गारंटी देता है, और कुंती ने इसे अपनाया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥