Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 1.15.22-23: हे राजन्, चूँकि आपने द्वारका नगरी के हमारे मित्रों और रिश्तेदारों के विषय में पूछा है, अतएव मैं आपको बता रहा हूँ कि ब्राह्मणों के शाप से वे सभी सड़ी हुई चावलों से बनी शराब पीकर उन्मत्त होकर एक-दूसरे को पहचानने के कारण लाठियाँ लेकर लड़ने लगे। अब केवल चार-पाँच को छोडक़र शेष सभी मर चुके हैं। | bhagavat अध्याय 1.15: पाण्डवों की सामयिक निवृत्ति । bhagavat स्कन्ध 1: सृष्टि । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन्, चूँकि आपने द्वारका नगरी के हमारे मित्रों और रिश्तेदारों के विषय में पूछा है, अतएव मैं आपको बता रहा हूँ कि ब्राह्मणों के शाप से वे सभी सड़ी हुई चावलों से बनी शराब पीकर उन्मत्त होकर एक-दूसरे को पहचानने के कारण लाठियाँ लेकर लड़ने लगे। अब केवल चार-पाँच को छोडक़र शेष सभी मर चुके हैं।
O King, since you have asked about our friends and relatives in the city of Dwaraka, I inform you that all of them, cursed by the Brahmins, became mad after drinking wine made from rotten rice and, not recognising each other, began fighting with each other with sticks. Now all of them, except four or five, are dead.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥