हे राजन्, अब मैं अपने मित्र और परम हितैषी पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान से बिछुड़ गया हूँ, इसलिए मेरा हृदय बिल्कुल खाली प्रतीत हो रहा है। उनकी अनुपस्थिति में, जब मैं कृष्ण की सभी पत्नियों की रखवाली कर रहा था, तब अनेक अधर्मी ग्वालों ने मुझे परास्त कर दिया।
O King, now that I am separated from my friend and most beloved well-wisher, the Supreme Personality of Godhead, my heart feels empty in every way. In his absence, when I was guarding all the wives of Krṣṇa, several untrustworthy cowherd men defeated me.
तात्पर्य
इस छंद में महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि कैसे यह संभव हुआ कि अर्जुन को नीच चरवाहों के गिरोह ने हराया और कैसे ऐसे सांसारिक चरवाहे भगवान कृष्ण की पत्नियों के शरीर को छू सकते थे, जो अर्जुन की सुरक्षा में थीं। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने विष्णु पुराण और ब्रह्म पुराण में शोध द्वारा विरोधाभास को उचित ठहराया है। इन पुराणों में कहा गया है कि एक बार स्वर्ग के निवासियों ने अपनी सेवा से अष्टावक्र मुनि को प्रसन्न किया था और मुनि द्वारा उन्हें सर्वोच्च भगवान को अपना पति बनाने का आशीर्वाद दिया गया था। अष्टावक्र मुनि अपने शरीर के आठ जोड़ों में मुड़े हुए थे, और इस प्रकार वह एक अजीब तरह से घुमावदार तरीके से चलते थे। मुनि की हरकतों को देखकर देवताओं की बेटियां अपनी हंसी नहीं रोक सकीं और मुनि उन पर क्रोधित होकर उन्हें शाप दिया कि उन्हें बदमाशों द्वारा अगवा कर लिया जाएगा, भले ही भगवान उन्हें अपना पति मिलेगा। बाद में, लड़कियों ने अपनी प्रार्थनाओं से मुनि को फिर से संतुष्ट किया, और मुनि ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि बदमाशों द्वारा लूटे जाने के बाद भी वे अपने पति को फिर से प्राप्त कर लेंगी। इसलिए, महान मुनि के वचन को रखने के लिए, भगवान ने स्वयं अर्जुन की सुरक्षा से अपनी पत्नियों का अपहरण कर लिया, अन्यथा जैसे ही बदमाशों द्वारा उन्हें छुआ जाता, वे तुरंत दृश्य से गायब हो जातीं। इसके अलावा, भगवान की पत्नियाँ बनने के लिए प्रार्थना करने वाली कुछ गोपियाँ अपनी इच्छा पूरी होने के बाद अपने-अपने पदों पर लौट गईं। भगवान कृष्ण के जाने के बाद, वह अपने सभी अनुचरों को वापस भगवान के पास ले जाना चाहते थे, और उन्हें केवल अलग-अलग परिस्थितियों में वापस बुलाया गया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥