शय्यासनाटनविकत्थनभोजनादि ष्वैक्याद्वयस्य ऋतवानिति विप्रलब्ध: ।
सख्यु: सखेव पितृवत्तनयस्य सर्वं सेहे महान्महितया कुमतेरघं मे ॥ १९ ॥
अनुवाद
हम दोनों सामान्य रूप से साथ-साथ रहते और सोते थे, साथ बैठते और घूमने जाते थे। और जब वे अपने बहादुरी भरे कारनामों का गुणगान करते तो कभी-कभी कोई भूल हो जाती थी, तब मैं मित्र को चिढ़ाता था और कहता था कि "हे मित्र, तुम तो बड़े सच्चे हो।" ऐसे मौकों पर भी वे परमात्मा होते हुए भी मेरे उटपटांग बोल सह लेते और उसी तरह क्षमा कर देते जिस तरह एक सच्चा मित्र अपने सच्चे मित्र को या एक पिता अपने बेटे को क्षमा कर देता है।
Generally we lived and slept together, sat together and went for walks together. And while praising myself for my acts of bravery, if I ever made a mistake, I would tease him by saying, “My friend, you are very truthful.” Even at that time when his importance was diminishing, being God, he tolerated my absurd talk and forgave me in the same way as a true friend forgives his true friend or a father forgives his son.
तात्पर्य
क्योंकि परमेश्वर श्री कृष्ण पूर्ण हैं इस लिए उनके शुद्ध भक्तों के साथ उनके दिव्य लीला में किसी भी दृष्टि से किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहती है, चाहे वह दोस्त का हो, बेटे का या प्रेमी का। प्रभु बड़े विद्वान पंडितों और धर्मियों द्वारा सरकारी तरीके से कीं गई वैदिक स्तुति से ज्यादा दोस्तों, माता पिता या मंगेतर के ताने का आनंद लेते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥