युद्ध के मैदान में, पानी की कमी एक सर्वविदित तथ्य है। वहां पानी बहुत दुर्लभ है, और युद्ध के मैदान पर लगातार काम करने वाले जानवरों और मनुष्यों को अपनी प्यास बुझाने के लिए लगातार पानी की आवश्यकता होती है। विशेष रूप से घायल सैनिकों और सेनापतियों को मृत्यु के समय बहुत प्यास लगती है, और कभी-कभी ऐसा होता है कि केवल पानी की कमी के कारण व्यक्ति को अनिवार्य रूप से मरना पड़ता है। लेकिन कुरुक्षेत्र की लड़ाई में जमीन को बोर करके पानी की इस तरह की कमी को हल किया गया। भगवान की कृपा से, जमीन को बोर करने की सुविधा हो तो किसी भी स्थान से आसानी से पानी प्राप्त किया जा सकता है। आधुनिक प्रणाली जमीन को बोर करने के इसी सिद्धांत पर काम करती है, लेकिन आधुनिक इंजीनियर अभी भी आवश्यकतानुसार तत्काल खुदाई करने में असमर्थ हैं। हालाँकि, पाण्डवों के दिनों से अब तक के इतिहास से पता चलता है कि अर्जुन जैसे बड़े सेनापति एक तेज तीर से केवल सतह की परत में प्रवेश करके कठोर जमीन के नीचे से पानी निकालकर घोड़ों को और क्या कहना पुरुषों को तुरंत पानी की आपूर्ति कर सकते थे, एक ऐसी विधि जो अभी भी आधुनिक वैज्ञानिकों के लिए अज्ञात है।
