तत्रैव मे विहरतो भुजदण्डयुग्मं
गाण्डीवलक्षणमरातिवधाय देवा: ।
सेन्द्रा: श्रिता यदनुभावितमाजमीढ
तेनाहमद्य मुषित: पुरुषेण भूम्ना ॥ १३ ॥
अनुवाद
स्वर्गलोक में कुछ दिन अतिथि रूप में निवास के दौरान, इन्द्रदेव समेत समस्त देवताओं ने गाण्डीव धनुष धारण करनेवाली मेरी भुजाओं का आश्रय लिया था, जिसका उद्देश्य निवातकवच नामक दानव को मारना था। हे आजमीढ के वंशज राजा, वर्तमान में मैं भगवान विष्णु से विहीन हो गया हूँ, जिनकी कृपा से मैं अत्यन्त शक्तिशाली था।
When I stayed in heaven as a guest for a few days, all the demigods of heaven, including Lord Indra, took shelter of my arms holding the Gandiva bow to kill the demon named Nivatakavacha. O king, descendant of Ajamidha, at this time I am bereft of the Supreme Personality of Godhead, by whose influence I was so powerful.
तात्पर्य
स्वर्गीय देवता निश्चित रूप से अधिक बुद्धिमान, शक्तिशाली और सुंदर हैं, और फिर भी उन्हें अर्जुन से मदद लेनी पड़ी क्योंकि उनका गाण्डीव धनुष भगवान श्री कृष्ण की कृपा से संपन्न था। भगवान सर्वशक्तिमान हैं, और उनकी कृपा से उनके शुद्ध भक्त उतने ही शक्तिशाली हो सकते हैं जितना वे चाहें, और इसकी कोई सीमा नहीं है। और जब प्रभु अपनी शक्ति किसी से छीन लेते हैं, तो वह प्रभु की इच्छा से शक्तिहीन हो जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥