उन्होंने ही उन दुष्टों की पत्नियों के बाल खोल दिये, जिन्होंने महारानी द्रौपदी की चोटी खोलने का दुस्साहस किया था। वह चोटी महान राजसूय यज्ञ के अवसर पर सुन्दर ढंग से सजाई तथा पवित्र की गई थी। उस समय द्रौपदी अपनी आँखों में आँसू भर कर भगवान कृष्ण के चरणों पर गिर पड़ी थी।
It was He who untied the hair of the wives of those wicked men who had dared to untie the braid of your Queen (Draupadi), which had been beautifully decorated and sanctified on the occasion of the great Rajasuya-yajna ceremony. At that time she fell at the feet of Lord Krishna with tears in her eyes.
तात्पर्य
रानी द्रौपदी के बालों का एक खूबसूरत गुंछा था जो राजसूय-यज्ञ के औपचारिक समारोह में पवित्र किया गया था। लेकिन जब वह एक शर्त में हार गई, तो दुःशासन ने उसका अपमान करने के लिए उसके गौरवशाली बालों को छुआ। द्रौपदी तब भगवान कृष्ण के चरण कमलों पर गिर पड़ी, और भगवान कृष्ण ने निर्णय लिया कि कुरुक्षेत्र की लड़ाई के परिणामस्वरूप दुःशासन और उनकी साथियों की सभी पत्नियों के बाल खुले होने चाहिए। इस प्रकार कुरुक्षेत्र की लड़ाई के बाद, धृतराष्ट्र के सभी पुत्रों और पौत्रों के युद्ध में मरने के बाद, परिवार की सभी पत्नियों को विधवाओं के रूप में अपने बाल खोलने पड़े। दूसरे शब्दों में, कुरु परिवार की सभी पत्नियाँ दुःशासन के भगवान के एक महान भक्त का अपमान करने के कारण विधवा हो गईं। भगवान किसी भी दुष्ट द्वारा स्वयं पर किए गए अपमान को सहन कर सकते हैं क्योंकि पिता पुत्र के अपमान को भी सहन करते हैं। लेकिन वह अपने भक्तों का अपमान कभी बर्दाश्त नहीं करता। एक महान आत्मा का अपमान करके, व्यक्ति को धर्म और आशीर्वाद के सभी परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥