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bhagavat 1.13.52: गंगा नदी का जल इसी स्थान पर सात शाखाओं में विभक्त हो गया था, इसलिए इसे सप्तस्रोत (सात द्वारा विभाजित) के नाम से जाना जाता है। ऐसा सातों महान ऋषियों को प्रसन्न करने के लिए किया गया था।   |   bhagavat अध्याय 1.13: धृतराष्ट्र द्वारा गृह-त्याग   ।   bhagavat स्कन्ध 1: सृष्टि   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 13: धृतराष्ट्र द्वारा गृह-त्याग  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.13.52 
स्रोतोभि: सप्तभिर्या वै स्वर्धुनी सप्तधा व्यधात् ।
सप्तानां प्रीतये नाना सप्तस्रोत: प्रचक्षते ॥ ५२ ॥
 
 
अनुवाद
गंगा नदी का जल इसी स्थान पर सात शाखाओं में विभक्त हो गया था, इसलिए इसे सप्तस्रोत (सात द्वारा विभाजित) के नाम से जाना जाता है। ऐसा सातों महान ऋषियों को प्रसन्न करने के लिए किया गया था।
 
This place is called Saptasrot (divided by seven) because here the water of the holy river Ganges was divided into seven branches. This was done to satisfy the great Saptarishis.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)