प्रह्लाद महाराज: भगवान कृष्ण (विष्णु) के एक आदर्श भक्त। उनके पिता, हिरण्यकश्यपु ने उन्हें केवल पाँच वर्ष की आयु में कठोर दंड दिया था जब वह भगवान के अद्वितीय भक्त बन गए थे। वह हिरण्यकश्यपु के पहले पुत्र थे, और उनकी माता का नाम कायाधु था। प्रह्लाद महाराज भगवान की भक्ति सेवा में एक अधिकारी थे क्योंकि उन्होंने अपने पिता की भगवान नृसिंहदेव से हत्या करवा दी थी, यह उदाहरण स्थापित करते हुए कि यदि ऐसा पिता भक्ति सेवा के मार्ग में बाधा हो तो उसे भी हटा देना चाहिए। उनके चार पुत्र थे, और सबसे बड़े पुत्र, विरोचन, ऊपर उल्लिखित बाली महाराज के पिता हैं। प्रह्लाद महाराज के कार्यों का इतिहास श्रीमद-भागवतम के सातवें कांड में वर्णित है।
