श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 12: सम्राट परीक्षित का जन्म  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.12.16 
दैवेनाप्रतिघातेन शुक्ले संस्थामुपेयुषि ।
रातो वोऽनुग्रहार्थाय विष्णुना प्रभविष्णुना ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों ने कहा: यह निष्कलंक पुत्र, आप पर अनुग्रह करने के लिए सर्वशक्तिमान तथा सर्वव्यापी भगवान् विष्णु द्वारा बचाया गया है। वह अन्यथा नियति के अनुसार एक अप्रतिरोध्य अलौकिक अस्त्र के हाथों नष्ट हो जाना था।
 
The brahmanas said: This blameless son has been saved by the omnipotent and omnipresent Lord Vishnu to bestow his favour upon you. He was saved when he was about to be destroyed by the unavoidable superdivine weapon.
तात्पर्य
बच्चे परीक्षित को सर्व-शक्तिशाली और सर्वव्यापी विष्णु (भगवान कृष्ण) ने दो कारणों से बचाया था। पहला कारण यह है कि उनकी माँ के गर्भ में पला बच्चा भगवान का शुद्ध भक्त होने के कारण बेदाग था। दूसरा कारण यह है कि वह बच्चा सदाचारी राजा युधिष्ठिर के पवित्र पूर्वज पुरु का एकमात्र जीवित पुरुष वंशज था। प्रभु ऐसे पवित्र राजाओं की वंशावली को जारी रखना चाहते हैं जो शांतिपूर्ण और समृद्ध जीवन की वास्तविक प्रगति के लिए पृथ्वी पर उनके प्रतिनिधि के रूप में शासन करें। कुरुक्षेत्र की लड़ाई के बाद, महाराजा युधिष्ठिर की अगली पीढ़ी तक का नाश हो गया, और कोई भी ऐसा नहीं था जो महान शाही परिवार में एक और पुत्र पैदा कर सके। अभिमन्यु का पुत्र महाराजा परीक्षित परिवार में एकमात्र जीवित उत्तराधिकारी था, और अश्वत्थामा के अप्रतिरोध्य अलौकिक ब्रह्मास्त्र हथियार से, उसे नाश करने के लिए मजबूर किया गया था। भगवान कृष्ण को यहाँ विष्णु के रूप में वर्णित किया गया है, और यह भी महत्वपूर्ण है। भगवान कृष्ण, भगवान का मूल व्यक्तित्व, विष्णु के रूप में रक्षा और विनाश का कार्य करते हैं। भगवान विष्णु भगवान कृष्ण का पूर्ण विस्तार है। भगवान की सर्वव्यापी गतिविधियों को उनके विष्णु स्वरूप द्वारा निष्पादित किया जाता है। बच्चे परीक्षित को यहाँ बेदाग सफेद के रूप में वर्णित किया गया है क्योंकि वह प्रभु का एक अमिश्रित भक्त है। भगवान के ऐसे अमिश्रित भक्त पृथ्वी पर केवल भगवान के मिशन को पूरा करने के लिए प्रकट होते हैं। भगवान चाहते हैं कि भौतिक सृष्टि में मँडराने वाली सशर्त आत्माओं को वापस भगवान के पास, वापस घर ले जाया जाए, और इस प्रकार वह वेदों जैसे पारलौकिक साहित्य तैयार करके, संतों और ऋषियों के मिशनरियों को भेजकर और अपने प्रतिनिधि, आध्यात्मिक गुरु को प्रतिनियुक्त करके उनकी मदद करते हैं। ऐसे पारलौकिक साहित्य, मिशनरी और प्रभु के प्रतिनिधि बेदाग सफेद होते हैं क्योंकि भौतिक गुणों का दूषित उन्हें छू भी नहीं सकता। जब भी उन्हें विनाश की धमकी दी जाती है तो उन्हें हमेशा भगवान द्वारा संरक्षित किया जाता है। ऐसी मूर्खतापूर्ण धमकियाँ स्थूल भौतिकवादियों द्वारा दी जाती हैं। अश्वत्थामा द्वारा बच्चे परीक्षित पर फेंका गया ब्रह्मास्त्र निश्चित रूप से अलौकिक रूप से शक्तिशाली था, और भौतिक दुनिया की कोई भी चीज उसके प्रवेश बल का विरोध नहीं कर सकती थी। लेकिन सर्व-शक्तिशाली प्रभु, जो हर जगह, अंदर और बाहर मौजूद हैं, एक भगवान के वास्तविक सेवक और एक अन्य भक्त महाराजा युधिष्ठिर के वंशज को बचाने के लिए अपनी सर्व-शक्तिशाली शक्ति के द्वारा इसका प्रतिकार कर सकते थे, जो हमेशा भगवान की अकारण दया से कृतार्थ थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)