अथाविशत् स्वभवनं सर्वकाममनुत्तमम् ।
प्रासादा यत्र पत्नीनां सहस्राणि च षोडश ॥ ३० ॥
अनुवाद
तत्पश्चात भगवान अपने महलों, जो सभी प्रकार से पूर्ण थे, में प्रविष्ट हुए। उनकी पत्नियाँ उनमें निवास करती थीं, और उनकी संख्या सोलह हजार से भी अधिक थी।
Thereafter the Lord entered His palaces, which were perfect in every way. His wives lived in them and they were more than sixteen thousand in number.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण के १६१०८ पत्नियाँ थीं और उनकी प्रत्येक पत्नी के लिए एक परिपूर्ण महल था जिसमें आँगन और बगीचे सभी कुछ सम्पूर्ण था। इन महलों का सम्पूर्ण वर्णन दसवें स्कंध में दिया गया है। सभी महल श्रेष्ठ संगमरमर से बने थे। वे रत्न जड़ित थे तथा मखमल और रेशम के पर्दों और कालीनों से सुशोभित थे और सुंदरता से सजाए गए थे तथा सुनहरे फीतों से कढ़ाई की गई थी। भगवान का अर्थ है वे जो पूर्ण शक्ति, पूर्ण ऊर्जा, पूर्ण वैभव, पूर्ण सुंदरता, पूर्ण ज्ञान तथा पूर्ण वैराग्य से परिपूर्ण हैं। इसलिए भगवान के महलों में भगवान की सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए किसी भी प्रकार की कमी नहीं थी। भगवान असीमित हैं और इसलिए उनकी इच्छाएं भी असीमित हैं और आपूर्ति भी असीमित है। यहाँ सब कुछ असीमित होने के कारण संक्षिप्त रूप से इसे सर्व-काम के रूप में वर्णित किया गया है या सभी वांछनीय उपकरणों से पूर्ण बताया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥