तब भगवान भौतिक गुणों के किसी भी रंग के बिना अपने दिव्य रूप में प्रकट होते हैं। वह सिर्फ अपनी रचना की स्थिति को सामान्य स्थिति में रखने के लिए उतरते हैं। सामान्य स्थिति यह है कि भगवान ने प्रत्येक ग्रह को मूल निवासी जीवों की सभी ज़रूरतों के साथ प्रदान किया है। प्रकट शास्त्रों में बताए गए नियमों और विनियमों का पालन करते हुए, वे खुशी से जी सकते हैं और अंत में मोक्ष प्राप्त करने के लिए अपने पूर्वनिर्धारित व्यवसायों का निष्पादन कर सकते हैं। भौतिक दुनिया नित्य-बद्ध या सनातन रूप से वातानुकूलित आत्माओं की इच्छाओं को संतुष्ट करने के लिए बनाई गई है, जैसे नटखट लड़कों को खेलने के लिए पालने दिए जाते हैं। अन्यथा भौतिक दुनिया की कोई ज़रूरत नहीं थी। लेकिन जब वे भगवान की मंजूरी के बिना गैरकानूनी रूप से संसाधनों का दोहन करने के लिए भौतिक विज्ञान की शक्ति के नशे में हो जाते हैं, और वह भी केवल इंद्रिय संतुष्टि के लिए, विद्रोहियों को दंडित करने और वफादारों की रक्षा के लिए भगवान के अवतार की आवश्यकता होती है।
जब वह उतरते हैं, तो वह अपने सर्वोच्च अधिकार को साबित करने के लिए अलौकिक कार्य करते हैं, और रावण, हिरण्यकशिपु और कंस जैसे भौतिकवादी पर्याप्त रूप से दंडित होते हैं। वह ऐसे तरीके से कार्य करते हैं जिसकी कोई नकल नहीं कर सकता है। उदाहरण के लिए, भगवान, जब वह राम के रूप में प्रकट हुए, ने हिंद महासागर को पाट दिया। जब वे कृष्ण के रूप में प्रकट हुए, तो उनके बचपन से ही उन्होंने पूतना, अघासुर, शकटासुर, कालिया, आदि को मारकर अलौकिक गतिविधियाँ दिखाईं, और फिर उनकी माँ के चाचा कंस को मार डाला। जब वह द्वारका में थे, उन्होंने १६,१०८ रानियों से शादी की, और उन सभी को पर्याप्त संख्या में बच्चे मिले। उनके व्यक्तिगत परिवार के सदस्यों की कुल संख्या लगभग १००,००० थी, जिन्हें लोकप्रिय रूप से यदु-वंश के नाम से जाना जाता था। और फिर, अपने जीवनकाल में, वह उन सभी को जीतने में कामयाब रहे। वह गोवर्धन-धारण हरि के रूप में प्रसिद्ध हैं क्योंकि उन्होंने केवल सात साल की उम्र में गोवर्धन नामक पहाड़ी को उठाया था। भगवान ने अपने समय में कई अवांछित राजाओं को मार डाला, और एक क्षत्रिय के रूप में उन्होंने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। वह असमर्थ के रूप में प्रसिद्ध हैं, अद्वितीय। कोई भी उसके बराबर या उससे बड़ा नहीं है।
