श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 7: जगद-आनन्द (विश्वों का आनंद)  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.7.67 
चन्दनागुरु-कस्तुरी-
कुङ्कुमैर् आहृतैर् वनात्
द्रव्यैः सु-गन्धिभिश् चान्यैः
पिष्टैर् अङ्गान्य् अलेपयत्
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने अंगों पर चंदन, अगुरु, कुंकुम, कस्तूरी तथा वन से लाए गए अन्य सुगंधित पदार्थों का लेप लगाया।
 
He applied sandalwood paste, aguru, kumkum, musk and other fragrant substances brought from the forest on his body.
तात्पर्य
कृष्ण के सा​थी ये सुगंधित वस्तुएँ उनके आनंद के लिए वृंदावन वन से लाए और पानी डालकर चट्टानों पर पीसकर एक लेप बनाया। कृष्ण ने इस लेप को अपने शरीर पर लगाया और एक बार फिर इसे अपने दोस्तों के साथ बाँटा। वृंदावन वन में सभी आनंददायक चीजें उपलब्ध हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)