जनमेजय ने यह कह कर अच्छा किया कि अब उनका जीवन सफल हो गया है क्योंकि उन्होंने गोलोक के गौरव के बारे में जैमिनी की कथा को ध्यान से सुना। भक्ति के साथ इस कथा को सुनने या जप करने मात्र से अथवा इसके बारे में गहराई से सोचने मात्र से कोई भी उस दुर्गम दिव्य निवास को प्राप्त कर सकता है। और अगर कोई गोलोक प्राप्ति के लिए नियत अभ्यास को गंभीरता से करता है, तो निश्चित रूप से वह सफलता प्राप्त करेगा।
इसलिए जैमिनी को विश्वास है कि शिष्य ने इन गौरवों को सुनकर अब अपने जीवन का लक्ष्य पूरा कर लिया है और उन्होंने स्वयं इन्हें सुनाकर अपना लक्ष्य पूरा कर लिया है। इस कथा को सुनने और जप करने के शुभ फल इस प्रकार निश्चित रूप से सुनिश्चित हो गए हैं।
