अगर गोपियों ने सच में कृष्ण के लिए सब कुछ त्याग दिया है तो वह मथुरा आकर उनके साथ क्यों नहीं रह जाती? ऐसा इसलिए नहीं करती है क्योंकि कृष्ण ने वादा किया था कि वह जल्द ही वृंदावन आएंगे। इस वादे के साथ ही, कृष्ण की खुशी की चिंता करती हुई गोपियाँ अपनी शारीरिक जिम्मेदारियों का पालन करती है जैसे- अपने पति, बच्चो को संभालना, अपने आप को अच्छे से तैयार करना और गहनों से सजना। नहीं तो, गोपियाँ अपने परिवार को छोड़कर चली जाएगी और अपने कपड़ो और गहनों को एक तरफ कर देगी जो कृष्ण ने उन्हें मथुरा से भेजा था। गोपियों का इन चीजों में कोई मोह नहीं है।
कृष्ण की खातिर, गोपियों ने इस जीवन और जन्म के बाद की कामनाओं को त्याग दिया है। उन्होंने सांसारिक सुख (लोका) और आध्यात्मिक सुख (धर्मा) की उम्मीद छोड़ दी है। कृष्ण ने माना कि गोपियाँ उन्हें पूरी तरह से समर्पित है, इसलिए वह उन्हें अपना कर्तव्य मानते है और उनकी शक्ति और खुशी का ख्याल रखते है। कृष्ण ही गोपियों की खुशी के स्रोत है, और वह उनके असली रक्षक है जो उनके पति से भी ज्यादा है। इसलिए उद्धव को कृष्ण के संदेश को वृंदावन तक पहुंचाने के लिए सहमत होना चाहिए।
यहां कृष्ण ने पुरुष सर्वनाम ye और tan का प्रयोग किया है क्योंकि, पुरुष या महिला, जो भी भक्त उनके लिए शुद्ध प्रेम रखते है वो उनके संरक्षण के लायक है। फिर भी, गोपियाँ, अपने औरत होने के कारण, एक खास योग्यता रखती है: उन्होंने एक महिला के लिए सबसे बड़ा त्याग किया है, उन्होंने कृष्ण के खातिर अपने सामाजिक संबंध (लोका) और लज्जा और शुद्धता जैसे महिला गुणों (धर्मा) त्याग दिए है।
उद्धव को शायद चिंता होगी कि गोपियाँ, सब कुछ त्यागने के बाद जंगल में भटक रही होंगी। ऐसे में वह उन्हें कैसे ढूंढ पाएंगे? और इसके अलावा, चूँकि उन्होंने समाजिक संबंधो को त्याग दिया है, तो वह पागल औरतों की तरह भूत-प्रेत से भयभीत होगी। ऐसे में वह उनसे कैसे बात कर पाएंगे? कृष्ण ने उद्धव को आश्वासन दिया कि भले ही गोपियों ने उनके लिए लोका और धर्मा का त्याग कर दिया हो, लेकिन वह उनका ध्यान रखते है और उनकी रक्षा करते है। वह उन्हें सांसारिक और आध्यात्मिक चीजें देते रहते है जिनको उन्होंने त्याग दिया है। इस तरह, जब उद्धव वृंदावन पहुंचेंगे तो वह गोपियों को उनके पति और बच्चो के साथ घर पर शांत मन से पाएंगे। इसके अलावा, कृष्ण खुद उन पति और बच्चो की देखभाल करते है जिन्हें गोपियों ने मानसिक रूप से त्याग दिया था। चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है कि गोपियों के परिवारों की देखभाल कौन करेगा, या समाज ने उनके पति को बाहर कर दिया होगा जिसकी वजह से उनकी पत्नी धार्मिक सिद्धांतों को त्याग गई थी। कृष्ण गोपियों के परिवार की रक्षा कर रहे है, और निश्चित रूप से वह खुद गोपियों और उनके धार्मिक सिद्धांतों की भी रक्षा कर रहे है। अपनी शक्ति से, कृष्ण अपने पति और बच्चो की जरूरतों की पूर्ति करते है, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह गोपियों की पूर्ति करते है। वह उनकी सांसारिक जरूरतों (लोका) को पूरा करते है, एक महिला के धार्मिक कर्तव्यों (स्त्री-धर्मा) को बनाए रखते है, और उन्हें उनकी प्राथमिक रूचि और सर्वोच्च धर्मा-नामा- कीर्तन और उन्हें अपनी भक्ति सेवा के अन्य आवश्यक पहलुओं में मजबूती से जोड़े रखते है।
संस्कृत के नियमों के अनुसार, ye tyakta को ye atyakta के छूटे हुए रूप के रूप में पढ़ा जा सकता है, और जब हम a- (“नहीं”) जोड़ने की स्वतंत्रता लेते है, तो इस श्लोक की आखिरी दो पंक्तियों का एक और अर्थ निकलता है: “केवल मेरे लिए ही गोपियों ने अपनी सांसारिक जिम्मेदारियों को [लोका-धर्मा] नहीं छोड़ा है। इसलिए, प्रिय उद्धव, चूँकि आप मुझ जैसे ही है, आपको वृंदावन जाना चाहिए, गोपियों को खुश करना चाहिए, उनकी शांति और स्वाभाविक विनम्रता की रक्षा करनी चाहिए, और उनके पति, उनके बच्चो और वृंदावन के हर किसी के लिए भी यही करना चाहिए।”
