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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 94
श्लोक
2.6.94
पुत्रैक-प्राणयाकर्ण्य
तं तद्-आर्ति-स्वरं तया
बहिर्-भूयाशु किं वृत्तं
किं वृत्तम् इति पृच्छ्यते
अनुवाद
उनकी माँ, जिनका जीवन केवल उनके कल्याण के लिए समर्पित था, ने वह आवाज़ सुनी और जल्दी से बाहर आईं और पूछा, "क्या हुआ है? क्या हुआ है?"
His mother, whose life was devoted solely to his welfare, heard the voice and hurried out and asked, "What's wrong? What's wrong?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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