श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.6.78 
उड्डीयोड्डीय पश्यन्तो
विहगास् तं व्रजान्तरे
रात्राव् अदृष्ट्वा क्रोशन्तो
रुदन्त इव निर्ययुः
 
 
अनुवाद
पक्षी उसे देखने के लिए गांव के ऊपर यहां-वहां उड़ते रहे, लेकिन जब रात हो गई और वे उसे नहीं देख सके तो वे रोने की तरह चिल्लाए और उड़ गए।
 
The birds flew here and there over the village to look for him, but when night fell and they could not see him, they cried like weeping and flew away.
तात्पर्य
गोलोक के सभी प्राणी, जंगल के जानवर और पक्षियों सहित कृष्ण की अमिश्र भक्ति में लीन हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)