श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  2.6.56 
अरण्य-वेशो विचलत्-कदम्ब-
मालावतंसाम्बर-बार्ह-मौलिः
सौरभ्य-संवासित-दिक्-तटान्तो
लीला-स्मित-श्री-विकसन्-मुखाब्जः
 
 
अनुवाद
कृष्ण वन के लिए तैयार थे। उनके वस्त्र, कुण्डल और मोरपंख का मुकुट, सब इधर-उधर लहरा रहे थे, और उनकी कदम्ब पुष्पों की माला भी। उनकी सुगंध से चारों ओर सुगंध फैल रही थी, और उनका सुंदर कमल-सा मुखमंडल एक चंचल मुस्कान से खिल उठा था।
 
Krishna was ready for the forest. His clothes, earrings, and peacock feather crown fluttered, as did his garland of kadamba flowers. Their fragrance spread all around, and his beautiful, lotus-like face was lit up with a playful smile.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)