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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 41
श्लोक
2.6.41
अथ तत्रागताम् एकां
वृद्धां नत्वाति-काकुभिः
अपृच्छं विहरत्य् अद्य
क्वासौ श्री-नन्द-नन्दनः
अनुवाद
तभी एक बुज़ुर्ग महिला वहाँ आईं। मैंने उन्हें प्रणाम किया और करुण स्वर में पूछा, "श्री नन्दन आज कहाँ खेल रहे हैं?"
Just then an elderly woman came over. I greeted her and asked in a sad voice, "Where is Mr. Nandan playing today?"
तात्पर्य
गोप-कुमार अभी भी नंद महाराज के ग्वाल गाँव के द्वार के अंदर बैठे थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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