श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 372
 
 
श्लोक  2.6.372 
तत्-तच्-छ्री-गोप-गोपीभिस्
ताभिर् गोभिश् च तादृशैः
पशु-पक्षि-कृमि-क्ष्माभृत्-
सरित्-तर्व्-आदिभिर् वृतम्
 
 
अनुवाद
गोकुल में भी, गोलोक की तरह, विविध प्रकार के दिव्य गोप, गोपियाँ और गायें विद्यमान हैं। और अन्य पशु, पक्षी, कीट, पर्वत, नदियाँ, वृक्ष और अन्य प्राणी भी प्रचुर मात्रा में हैं।
 
In Gokula, like in Goloka, there are various kinds of divine cowherds, cowherds, and cows. And there are also a plethora of other animals, birds, insects, mountains, rivers, trees, and other creatures.
तात्पर्य
गोलोक और गोकुल की आपस में रहनेवालों की हर एक व्यक्तिगत जानकारी तक समानता है। एक स्थान पर भूमिका निभाने वाले व्यक्तिगत व्यक्ति दूसरे स्थान से भिन्न हो सकते हैं, लेकिन ईश्वर के व्यक्तित्व के आनंदिल मनोरंजन में उनकी भूमिकाएँ एक जैसी ही होते हैं। गोकुल के चरवाहे पुरुष और स्त्रियाँ और सभी प्राणी, लताओं और झाड़ियों तक, आध्यात्मिक दुनिया में अपने समकक्षों से बहुत मिलते-जुलते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)