श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 340
 
 
श्लोक  2.6.340 
व्याकुलं कृष्णम् आलक्ष्य
यियासुं सन्न्यवर्तयन्
वसुदेवादयो धीरा
यादवा युक्ति-पङ्क्तिभिः
 
 
अनुवाद
वसुदेव तथा अन्य चतुर यादवों ने देखा कि कृष्ण अत्यन्त व्याकुल हैं, तथा जाना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने अनेक तर्क देकर उन्हें वापस लौटने के लिए मनाया।
 
Vasudeva and other clever Yadavas saw that Krishna was very anxious and wanted to leave, so they persuaded him to return by giving many arguments.
तात्पर्य
ऐसा लगा मानो नंदा सही था; कृष्ण उसके साथ घर जाना चाहते थे। लेकिन यादवों ने कृष्ण से जाने को मना करते हुए तर्क दिया कि संकटों से बचाने के लिए कृष्ण को मथुरा में रहने की आवश्यकता थी, और संकटों में सबसे बड़ा जरासंध के आक्रमण का भय भी था। वे कृष्ण को मनाने के कारणों को बार-बार रखते रहे जब तक कृष्ण रहने के लिए सहमत नहीं हो गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)