श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 326
 
 
श्लोक  2.6.326 
उग्रसेनं च कंसस्य
तातं राज्ये ’भ्यषेचयत्
आनिन्ये यादवान् दिग्भ्यः
पौरांश् चाश्वासयज् जनान्
 
 
अनुवाद
उन्होंने कंस के पिता उग्रसेन को राजा बनाया, यादवों को सभी दिशाओं से वापस लाया और नगर के लोगों को सांत्वना दी।
 
He made Kansa's father Ugrasena the king, brought back the Yadavas from all directions and consoled the people of the city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)