श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 325
 
 
श्लोक  2.6.325 
श्री-सरूप उवाच
कृष्णो मधु-पुरीं गत्वा
तत्रत्यान् परितोष्य तान्
कंसं सानुचरं हत्वा
पितरौ तौ व्यमोचयत्
 
 
अनुवाद
श्री सरूप ने कहा: कृष्ण मधुपुरी गए, जहाँ उन्होंने वहाँ के सभी निवासियों को प्रसन्न किया। उन्होंने कंस और उसके अनुयायियों का वध किया और अपने माता-पिता का उद्धार किया।
 
Sri Sarup said: Krishna went to Madhupuri, where he pleased all the inhabitants. He killed Kansa and his followers and saved his parents.
तात्पर्य
खुद पर से नियंत्रण खो देने के खतरे से बचने के लिए श्री सरूप ने विषय बदला। जब कृष्ण पहली बार मथुरा में प्रवेश किये तो वहाँ के अनेक निवासियों को उन्होंने आशीर्वाद दिया था, जिसमें एक दर्जी और एक मालाकार भी थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)