श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 323
 
 
श्लोक  2.6.323 
श्री-परीक्षिद् उवाच
एवं वदन्न् अये मातः
सरूपः करुण-स्वरैः
रुदन्न् उच्चैः स-कातर्यं
मुमोह प्रेम-विह्वलः
 
 
अनुवाद
श्री परीक्षित बोले: हे माता, ऐसा कहकर सरूप दुःख से भरे हुए स्वर में जोर-जोर से रोने लगे और शुद्ध प्रेम के उल्लास से अभिभूत होकर मूर्छित हो गए।
 
Sri Parikshit said: O Mother, having said this, Sarupa began to weep loudly in a voice filled with sorrow and, overwhelmed with the ecstasy of pure love, fainted.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)