श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 322
 
 
श्लोक  2.6.322 
तेषां व्रज-जनानां तु
या दशाजनि दुःश्रवा
दलन्ति कथया तस्या
हा हा वज्रादयो ’प्य् अलम्
 
 
अनुवाद
उस समय व्रजवासियों ने जो कष्ट सहे, वह सुनने में बहुत कष्टदायक है। हाय, हाय! इस विषय को बताने से बिजली भी टूट जाती है। मैंने बहुत कुछ कह दिया।
 
The suffering the people of Vraja endured at that time is horrifying to hear. Alas, alas! Even the lightning strikes when I mention this. I've said too much.
तात्पर्य
जिन लोगों ने कृष्ण के वृज वासियों को गए हुए समय दुख हुए थे, उसके बारे में सुना है, उन्हे भी वैसे ही दुख उठाने पड़ेंगे। इसलिए जो लोग दुख उठाने को इच्छुक नहीं हैं, उनकी संगति में इस विषय पर चर्चा न करना ही बेहतर हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)